बच्चे पर नज़र रखें - Monitor Your Kid, Parenting Tips In Hindi, baccho par hamesa najar rakhe taki wo bigade nahi...
बच्चे के प्रति माता-पिता क behavior कैसा होना चाहिए , इस सम्बन्ध में एक बात यह भी शामिल है कि वे अपने बच्चों पर नज़र रखें . यहाँ नजर रखने का मतलब यह नहीं है कि वे अपने बच्चों की जासूसी करें . बल्कि यह है कि वे अपने बच्चे के काम का दिन भर का time-table अपने पास रखें .
ऐसे माता-पिता भी आपने देखें होंगे , जो अपने बच्चों के सम्बन्ध में कहेंगे -
' हमारे बच्चे अब समझदार हो गए हैं . '
' हमे उनके बारे में सोचने की आवश्यकता ही नहीं है . '
' हमे अपने बच्चों पर पूरा भरोसा है . '
' बच्चे जो कुछ कर रहे हैं , ठीक कर रहे हैं . अपना अच्छा-बुरा उन्हें खुद देखना चाहिए . '
माता-पिता के इन बातों में कोई बुराई नहीं है . बच्चे अगर बड़े हो गए हैं , तो यह संभव है कि वे समझदार हो गये हों और वे अभी से अपने future के विषय में सोचने लगे हों . हर माता-पिता को अपने बच्चों पर इतना भरोसा जरुर होना चाहिए .
मगर सुनिए .......
क्या आप उनके दिन भर के कामो को देखकर पुरे विश्वास के साथ यह कह सकते हैं कि वे समझदार हो गये हैं और उन्होंने future के विषय में सोचना शुरू कर दिया है ? आपको अपने बच्चे पर पूरा भरोसा है . लेकिन यह भी तो हो सकता है कि बच्चा आपके विश्वास को धोखा दे रहा हो .
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बच्चे पर नज़र रखें - Monitor Your Kid, Parenting Tips In Hindi, baccho par hamesa najar rakhe taki wo bigade nahi...
इस विषय में एक उदाहरण मेरे पास में है - माता-पिता दोनों working हैं और दोनों दिन भर बाहर रहते हैं . एक बेटा है , बेटे में उन्होंने कोई अवगुण नहीं देखा . अपने बेटे को वो हर प्रकार से योग्य और समझदार समझते थे . बेटे की दिनचर्या भी अच्छी थी . शाम को माता-पिता के लौटने से पहले ही वह अपनी books लेकर बैठ जाता और रात में भी 10 बजे तक अपनी books में उलझा रहता .
माता-पिता निश्चिंत थे . अपने बेटे की वह हर किसी से प्रशंसा करते . लेकिन एक दिन उनके विश्वास को तब धक्का लगा , जब बेटा घर के जेवर लेकर फरार हो गया .
वह तो अच्छा हुआ कि train में श्रीमान जी के एक मित्र ने उसे देख लिया और वे उसे समझा-बुझाकर घर ले आये .
इस उदाहरण में आपको बच्चे के बिगड़ने के पीछे कई कारण नजर आयेंगे . जैसे - ठीक से मार्ग-दर्शन न होना . माता-पिता द्वारा बच्चे को प्रयाप्त स्नेह और सम्मान न देना और बच्चे का बुरी संगती में रहना . लेकिन इन सब कारणों में मुख्य कारण यह है कि माता-पिता बच्चे की ओर लापरवाह रहे और उन्होंने कभी भी यह जानने की कोशिश नहीं किया कि उनके बच्चे के देनिक कार्यों का लेखा जोखा क्या है . साथ ही कभी यह भी न जाना कि उनका बच्चा किस प्रकार के बच्चों के साथ खेलता है .
श्रीमान यादव जी अत्यंत व्यस्त जीवन जीते हैं , फिर भी वे सप्ताह में एक बार अपने बच्चों के school में जरुर जाते हैं और teachers से अपने बच्चो के विषय में जरुर पूछते हैं .
वे अपने ढंग से ये भी जानकारी लेते हैं कि उनके बच्चे ने दिन भर क्या किया और वे किस प्रकार के बच्चों के साथ खेलते हैं . ऐसा नहीं है की वे अपने बच्चों पर भरोसा नहीं करते . वे कहते हैं . " हमें अपने बच्चों पर विश्वास करना चाहिए , लेकिन इसके साथ ही अपने बच्चों पर नजर भी रखनी चाहिए . हमें ये जरुर देखना चाहिए की हमारे बच्चे दिन भर क्या करते हैं और किस प्रकार की संगती में रहते हैं .
बच्चे के प्रति माता-पिता क behavior कैसा होना चाहिए , इस सम्बन्ध में एक बात यह भी शामिल है कि वे अपने बच्चों पर नज़र रखें . यहाँ नजर रखने का मतलब यह नहीं है कि वे अपने बच्चों की जासूसी करें . बल्कि यह है कि वे अपने बच्चे के काम का दिन भर का time-table अपने पास रखें .
ऐसे माता-पिता भी आपने देखें होंगे , जो अपने बच्चों के सम्बन्ध में कहेंगे -
' हमारे बच्चे अब समझदार हो गए हैं . '
' हमे उनके बारे में सोचने की आवश्यकता ही नहीं है . '
' हमे अपने बच्चों पर पूरा भरोसा है . '
' बच्चे जो कुछ कर रहे हैं , ठीक कर रहे हैं . अपना अच्छा-बुरा उन्हें खुद देखना चाहिए . '
माता-पिता के इन बातों में कोई बुराई नहीं है . बच्चे अगर बड़े हो गए हैं , तो यह संभव है कि वे समझदार हो गये हों और वे अभी से अपने future के विषय में सोचने लगे हों . हर माता-पिता को अपने बच्चों पर इतना भरोसा जरुर होना चाहिए .
मगर सुनिए .......
क्या आप उनके दिन भर के कामो को देखकर पुरे विश्वास के साथ यह कह सकते हैं कि वे समझदार हो गये हैं और उन्होंने future के विषय में सोचना शुरू कर दिया है ? आपको अपने बच्चे पर पूरा भरोसा है . लेकिन यह भी तो हो सकता है कि बच्चा आपके विश्वास को धोखा दे रहा हो .
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बच्चे पर नज़र रखें - Monitor Your Kid, Parenting Tips In Hindi, baccho par hamesa najar rakhe taki wo bigade nahi...
इस विषय में एक उदाहरण मेरे पास में है - माता-पिता दोनों working हैं और दोनों दिन भर बाहर रहते हैं . एक बेटा है , बेटे में उन्होंने कोई अवगुण नहीं देखा . अपने बेटे को वो हर प्रकार से योग्य और समझदार समझते थे . बेटे की दिनचर्या भी अच्छी थी . शाम को माता-पिता के लौटने से पहले ही वह अपनी books लेकर बैठ जाता और रात में भी 10 बजे तक अपनी books में उलझा रहता .
माता-पिता निश्चिंत थे . अपने बेटे की वह हर किसी से प्रशंसा करते . लेकिन एक दिन उनके विश्वास को तब धक्का लगा , जब बेटा घर के जेवर लेकर फरार हो गया .
वह तो अच्छा हुआ कि train में श्रीमान जी के एक मित्र ने उसे देख लिया और वे उसे समझा-बुझाकर घर ले आये .
इस उदाहरण में आपको बच्चे के बिगड़ने के पीछे कई कारण नजर आयेंगे . जैसे - ठीक से मार्ग-दर्शन न होना . माता-पिता द्वारा बच्चे को प्रयाप्त स्नेह और सम्मान न देना और बच्चे का बुरी संगती में रहना . लेकिन इन सब कारणों में मुख्य कारण यह है कि माता-पिता बच्चे की ओर लापरवाह रहे और उन्होंने कभी भी यह जानने की कोशिश नहीं किया कि उनके बच्चे के देनिक कार्यों का लेखा जोखा क्या है . साथ ही कभी यह भी न जाना कि उनका बच्चा किस प्रकार के बच्चों के साथ खेलता है .
श्रीमान यादव जी अत्यंत व्यस्त जीवन जीते हैं , फिर भी वे सप्ताह में एक बार अपने बच्चों के school में जरुर जाते हैं और teachers से अपने बच्चो के विषय में जरुर पूछते हैं .
वे अपने ढंग से ये भी जानकारी लेते हैं कि उनके बच्चे ने दिन भर क्या किया और वे किस प्रकार के बच्चों के साथ खेलते हैं . ऐसा नहीं है की वे अपने बच्चों पर भरोसा नहीं करते . वे कहते हैं . " हमें अपने बच्चों पर विश्वास करना चाहिए , लेकिन इसके साथ ही अपने बच्चों पर नजर भी रखनी चाहिए . हमें ये जरुर देखना चाहिए की हमारे बच्चे दिन भर क्या करते हैं और किस प्रकार की संगती में रहते हैं .
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