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मुर्ख शिष्य को उपदेश देना - Chhanakya Anmol Wachan, In Hindi

मुर्ख शिष्य को उपदेश देना - Chhanakya Anmol Wachan, In Hindi
चाणक्य अनमोल वचन

श्लोक


मुर्खशिष्योपदेशेन दुष्टस्त्रीभरणन च  l
दु:खिते: सम्प्रयोगेण पण्डितो प्यवसीदती   ll

अर्थ  -


चाणक्य इस श्लोक में कहते है की मुर्ख शिष्य को उपदेश देने , दुष्ट और कुलटा स्त्री के भरण-पोषण करने तथा दुखी व्यक्तियों के संग में रहने से बुद्धिमान व्यक्ति को भी कष्ट हो सकता है . यहां चाणक्य ने यह स्पष्ट किया है कि मुर्ख शिष्य को भली बात के लिए प्रेरित नहीं करनी चाहिए . इसी प्रकार दुष्ट आचरण वाली स्त्री का संग करना भी अनुचित है और दुखी व्यक्ति के पास बैठने- उठने और समागम से ज्ञानवान पुरुष को भी दुख उठाना पड़ सकता है .

देखने में बात कुछ व्यक्तियों को साधारण प्रतीत होती हो , परन्तु यदि इन बातों पर थोड़ा गंभीरतापूर्वक विचार किया जाए तो यह स्पष्ट हो जाता है कि चाणक्य ने बड़ी गंभीर बात कही है .

सीख , उपदेश अथवा परामर्श उसी व्यक्ति को देनी चाहिए जो उसके योग्य हो अथवा सिख लेने की जिसकी इच्छा हो . बन्दर और बया के घोसले की कथा बड़ी प्रसिद्ध है . वर्षा से भीगते हुए बन्दर को देख कर अपने घर में बैठी बया ने बन्दर को घर बना लेने की सिख दी , परन्तु बन्दर उस सिख के योग्य ना था . इसलिए उसने सिख देने वाली बया को ही बेघर कर दिया .

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